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रविवार, 13 जून 2010

तुम्हारे इंतजार मै ......

हाँ ... चाँद ही तो हो तुम
जिसकी रोशनी से मैने
रात के अँधेरे मै प्यार का सफ़र तय्किया
और इस सफ़र मै कई अमावस आई गई
हाँ .... पर शायद
यह अमावस बहुत लम्बी है
बहुत लम्बी है
फिर भी
खुद को जलाकर
जुगनू बनाकर
वन, वृक्ष, टहनियों पर
रहकर
उम्र भर
तकता रंहुंगा आसमान को
पूर्णिमा के इंतजार मै
तुम्हारे इंतजार मै ......

                              अनूप पालीवाल

नजरिया

जो भी रचा है , मैंने
मे उसी का हिस्सा हूँ
पूरी तरह मोजूद हूँ उसमे
मेरा बहरिकरण और अंतःकरण
हर तरह से उत्तरदाई है
मे अपनी तमाम कमियों और अतियो मे सामिल हूँ
मेरे अज्ञान या मेरी लापरवाही से छुट गई है
जो गूंजाइशे
उसे मे पूरा नहीं कर संकुंगा उम्र भर
मै अपनी रची दुनिया के लिए दोषी हूँ
इसमे सामिल नहीं है
दुनिया भर के झगड़े, घर की परेशानी
पड़ोस के किस्से, दोस्तों की जरुरत
जानगया हूँ
ईश्वर ने रचा है मुझे
मै मनुष्य हूँ
मै मनुष्य होने की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता
अन्तःतह मै
निसंकोच कहूँगा
मै अपना नजरिया
अपनी सोच बदलूँगा ........
                                      अनूप पालीवाल  

शुक्रवार, 4 जून 2010

समझौता

"तुम लोगों को देखते हो -- वे दुखी हैं क्योंकि उन्होंने हर मामले में समझौता किया है, और वे खुद को माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने समझौता किया है। वे जानते हैं कि वे साहस कर सकते थे लेकिन वे कायर सिद्ध हुए। अपनी नजरों में ही वे गिर गए, उनका आत्म सम्मान खो गया। समझौते से ऐसा ही होता है।" ओशो

गुरुवार, 3 जून 2010

माँ - मुनव्वर राना

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है
मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है


घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें
मुझको मत रोक मुझे लौट के घर जाना है

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

मैदान छोड़ देने से मैं बच तो जाऊँगा
लेकिन जो यह ख़बर मेरी माँ तक पहुँच गई

‘मुनव्वर’! माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमीं अच्छी नहीं होती 

                                                         -  मुनव्वर राना

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

कोशिश वही करते है


चलते वही है जो चलना चाहते है
कोशिश वही करते है  जो कुछ  करना चाहते है 
किस्मत पेड़ो पर नहीं उगती
और नाही बाजारों मे बिकती है
किस्मत वही बनाते है जो कुछ पाना चाहते है

ख्वाब धुल है उनके लिए जो
इसे हकीकत करना नही चाहते
ख्वाब फूल है उनके लिए जो
इसे कभी मुरझाने देना नही चाहते
ख्वाबो को सच वही करते है जो जागना चाहते है