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बुधवार, 26 अक्टूबर 2011

दिवाली शुभ ... हर चहरे पर ख़ुशी खूब हो ...

आप के दुश्मनों के मुह काले हो 
आप के हर कदम पर उजाले हो 
आप के पीछे टार्च लेकर चलने वाले 
आप से जलने वाले हो  
आप से जलने वाले हो ...

दिवाली शुभ ... हर चहरे पर ख़ुशी खूब हो ... 

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

अपना चेहरा कभी अख़बार को देता हूँ ।

जो भी मिल जाता है घर बार को देता हूँ।
या किसी और तलबगार को देता हूँ।
धूप को दे देता हूँ तन अपना झुलसने के लिये
और साया किसी दीवार को देता हूँ।
जो दुआ अपने लिये मांगनी होती है मुझे
वो दुआ भी किसी ग़मख़ार को देता हूँ।
अब भी अगर कोई नहीं है, न सही
हक़ तो मैं पहले ही हक़दार को देता हूँ।
जब भी लिखता हूँ मैं अफ़साना यही होता है
अपना सब कुछ किसी किरदार को देता हूँ।
ख़ुद को कर देता हूँ कागज़ के हवाले अक्सर
अपना चेहरा कभी अख़बार को देता हूँ ।

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

क्यों की विचार बदलेगा तो परिणाम बदलेगा .....

हमारा देश आज़ाद हुआ है मगर हमारे विचार आज भी गुलाम है स्वार्थ के, लालच के.... किसी को किसी भी तरह की हनि पहुंचाते वक़्त हम जरा भी इस देश इस समाज के बारे मै नहीं सोचते.... सिर्फ अपने फायदे के लिए.... क्यों की हमे अपना घर अपना परिवार दिखाई देता है
और हम आज ही के दिन याद करते है और भूल जाते है आने वाले छे महीने के लिए .... की कोई दिन आया था कभी देश का ....
सिर्फ जरुरत है विचार बदने की ....क्यों की विचार बदलेगा तो परिणाम बदलेगा ......