झलक जालक
शुक्रवार, 28 जनवरी 2011
शनिवार, 4 दिसंबर 2010
सच्चे मित्र की तलाश
सच्चे मित्र की तलाश करेंगे तो
सारी जिन्दगी गुजर जाएगी तो भी नहीं मिलेगा
क्यों की समुद्र मै मोती तलाश ने के बराबर है
तो पत्थरों मै हिरा तलाश ने के बराबर है
सच्चा मित्र मिल सकता है
जब आप
खुद को पानी बना ले
दोस्त आयेगा खुद ही पानी मै
घुल जायेगा, मिल जायेगा
जो न मिल पाए
ओ छट जायेगा, हट जायेगा
सच्चा मित्र मिल जायेगा
कभी भी कोई भी इन्सान किसी को बदल नहीं सकता, कोई हमे देख कर खुद को बदल ले वही हमारा मित्र है
सारी जिन्दगी गुजर जाएगी तो भी नहीं मिलेगा
क्यों की समुद्र मै मोती तलाश ने के बराबर है
तो पत्थरों मै हिरा तलाश ने के बराबर है
सच्चा मित्र मिल सकता है
जब आप
खुद को पानी बना ले
दोस्त आयेगा खुद ही पानी मै
घुल जायेगा, मिल जायेगा
जो न मिल पाए
ओ छट जायेगा, हट जायेगा
सच्चा मित्र मिल जायेगा
कभी भी कोई भी इन्सान किसी को बदल नहीं सकता, कोई हमे देख कर खुद को बदल ले वही हमारा मित्र है
मंगलवार, 23 नवंबर 2010
हम तुम्हारे तब भी थे
कहने को तो हम, खुश अब भी हैं
हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं
हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं
रूठने-मनाने के इस खेल में, हार गए हैं हम
हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं
हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं
मेरी ख़ता बस इतनी है, तुम्हारा साथ चाहता हूँ
तब तो पास होके दूर थे, और दूरियाँ अब भी हैं
तब तो पास होके दूर थे, और दूरियाँ अब भी हैं
मुझसे रूठ के दूर हो, पर एहसास तो करो
प्यासे हम तब भी थे, प्यासे हम अब भी हैं
प्यासे हम तब भी थे, प्यासे हम अब भी हैं
इस इंतज़ार में मेरा क्या होगा, तुम फिक्र मत करना
सुकून से हम तब भी थे, सुकून से हम अब भी हैं
सुकून से हम तब भी थे, सुकून से हम अब भी हैं
बस थोड़ा रूठने के अंजाम से डरते हैं
डरते हम तब भी थे, डरते हम अब भी हैं
डरते हम तब भी थे, डरते हम अब भी हैं
हमारी तमन्ना कुछ ज़्यादा नहीं थी, जो पूरी न होती
कम में गुज़ारा तब भी था, कम में गुज़ारते अब भी हैं
कम में गुज़ारा तब भी था, कम में गुज़ारते अब भी हैं
चलते हैं तीर दिल पे कितने, जब तुम रूठ जाते हो
ज़ख्मी हम तब भी थे, ज़ख्मी हम अब भी हैं
ज़ख्मी हम तब भी थे, ज़ख्मी हम अब भी हैं
मेरी मासूमियत को तुम, ख़ता समझ बैठे हो
मासूम हम तब भी थे, मासूम हम अब भी हैं
मासूम हम तब भी थे, मासूम हम अब भी हैं
आप हमसे रूठा न करें, बस यही इल्तिजा है
फ़रियादी हम तब भी थे, फ़रियादी हम अब भी हैं
फ़रियादी हम तब भी थे, फ़रियादी हम अब भी हैं
तुम हो किस हाल में, कम से कम ये तो बता दो
बेखब़र हम तब भी थे, बेखब़र हम अब भी हैं
बेखब़र हम तब भी थे, बेखब़र हम अब भी हैं
जो याद आजाये तू ...
जो याद आजाये तू ...
तो भीगे लम्हात लिखू
महकती हुई बात लिखू
बहकता हुआ साथ लिखू
जो याद ....
रात गुजरती नहीं
दिन ढलता नहीं
कोई कुछ कहता है
मै सुनता नहीं
जो याद ....
तुझसे मिलने की चाहत रहती है
ये सांसे हर पल कहती है
तू मेरे जिस्म मै बहती है
पिघलती, जलती, मचलती है
जो याद ...
तो भीगे लम्हात लिखू
महकती हुई बात लिखू
बहकता हुआ साथ लिखू
जो याद ....
रात गुजरती नहीं
दिन ढलता नहीं
कोई कुछ कहता है
मै सुनता नहीं
जो याद ....
तुझसे मिलने की चाहत रहती है
ये सांसे हर पल कहती है
तू मेरे जिस्म मै बहती है
पिघलती, जलती, मचलती है
जो याद ...
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