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बुधवार, 1 अप्रैल 2009


"मुझे एक उद्धारक की तरह न देखें। इस विचार के कारण ही- कि कोई उद्धारक आ गया है, कोई मसीहा आ गया है- लोग वैसे ही जीते रहते हैं जैसे वे जीते रहे हैं। वे क्या कर सकते हैं? उनका कहना है कि सब कुछ तभी होगा जब कोई मसीहा आयेगा। यह उनका ढंग है रूपांतरण को टालने का, यह उनका ढंग है स्वयं को धोखा देने का। बहुत हो चुका, बहुत दे दिया धोखा स्वयं को। अब और नहीं। कोई मसीहा नहीं आने वाला। तुम्हें स्वयं कार्य करना होगा,तुम्हें स्वयं के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी। और जब तुम ज़िम्मेदार होते हो तो सब कुछ स्वयं घटने लगता है।"
- ओशो

कट ही गई जुदाई भी....


कट ही गई जुदाई भी कब यूँ हुआ के मर गए


तेरे भी दिन गुज़र गए मेरे भी दिन गुज़र गए


तू भी कुछ और है हम भी कुछ और है


जाने वो तू किधर गया जाने वो हम किधर गये


राहों में ही मिले थे हम राहें नसीब बन गायें


तू भी न अपने घर गया हम भी न अपने घर गये


वो भी गुबार -ऐ -ख़ाक था हम भी गुबार -ऐ -ख़ाक थे


वो भी कहीं बिखर गया हम भी कहीं बिखर गये



कोई किनार -ऐ -आब - ऐ -जू बैठा हुआ है सर झुकाए


कश्ती किधर गये जाने किधर भंवर गए


- अनूप पालिवाल , सेंधवा




कठनाई से रीता जीवन


मेरे लिए नही


नही मेरे तूफानी मन को यह स्वीकार नही !


मुझे तो चाहिए एक महान उंचा लक्ष्य


और उसके लिए उम्र - भर संघर्षो का अटूट क्रम ।


ओ कला ! तू खोल !


मानवता की धरोहर , अपने अमूल्य कोशो के द्वार


मेरे लिए खोल !


हे प्रभु !


हे प्रभु !

मुझे उन बातो को स्वीकारने का

धेर्य दे ...

जिन्हें में बदल नही सकता

हिम्मत दे ...

उन् बातो को बदलने की

जिन्हें में बदल सकता हूँ

और इन दोनों के अन्तर को

समझने की बुद्धि दे ...

- अनूप पालीवाल, सेंधवा

इश्वर ने इससे इंकार कब किया है ......


आकाश हमेशा नीला हो

इश्वर का एसा कोई वादा नही है

राह में हमेशा फूल बिछे हो

यह जरुरी नही है

दुख के बिना शान्ति हो

इश्वर ने ऐसा वादा कब किया है

लेकिन

लक्ष्य के लिए शक्ति और रास्ते के लिए प्रकाश है ...

हमेशा है ...

इश्वर ने इससे इंकार कब किया है

- अनूप पालीवाल, सेंधवा